ऑक्सीजेनेटेड वॉटर भी मददगार है क्योंकि पर लेकिन आपको इसे शुद्ध रूप में इस्तेमाल करना होता है और यह आपकी त्वचा को नुकसान पहुंचाता है. कोई बैक्टेरीसाइड काम का नहीं. बैक्टीरिया के उलट यह वायरस कोई जिंदा चीज नहीं है. ऐसे में ये निर्जीव चीज को खत्म नहीं कर सकते.सतह पर चिपक जाता है...
कभी भी यूज्ड या अनयूज्ड कपड़े, शीट्स को झटकें नहीं. हालांकि यह पोरस (सरंध्र) सतह पर चिपक जाता है, लेकिन यह फैब्रिक और पोरस चीजों पर 3 घंटे में खत्म हो जाता है. चार घंटे में यह कॉपर की सतह पर खत्म हो जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इसकी नमी इन पदार्थों पर सूख जाती है.
यह 24 घंटे में कार्डबोर्ड, 42 घंटे में मेटल और 72 घंटे में प्लास्टिक पर सूख जाता है. लेकिन अगर आप कपड़ों आदि को झटकते हैं या फीदर डस्टर यूज करते हैं तो वायरस मॉलीक्यूल हवा में उड़ जाता है और यह वहां पर तीन घंटे तक टिका रह सकता है. वहां से यह आपकी नाक में भी जा सकता है.
वायरस मॉलीक्यूल कड़ाके की ठंड में बेहद देर तक टिका रहता है. इसके अलावा, घरों और कारों में लगे एयर कंडीशनर्स पर भी यह ज्यादा देर टिक सकता है. इन्हें टिके रहने के लिए नमी की भी जरूरत होती है और खासतौर पर अंधेरे में ये ज्यादा देर तक बने रहते हैं.वायरस का प्रोटीन
ऐसे में, सूखे, बिना आर्दता वाले, गर्म और रोशनी वाले माहौल में यह तेजी से टूट जाता है. किसी वस्तु पर यूवी लाइट से इस वायरस का प्रोटीन टूट जाता है. मिसाल के तौर पर, मास्क को डिसइनफेक्ट करने और दोबारा इस्तेमाल करने के लिए ऐसा किया जा सकता है. लेकिन, सावधान रहें क्योंकि यह स्किन में मौजद कोलेजन को भी तोड़ देता है.
और ऐसे में झुर्रियां और स्किन कैंसर पैदा कर सकता है. यह वायरस स्वस्थ स्किन से अंदर नहीं जा सकता है. सिरका (विनेगर) इस पर काम नहीं करता क्योंकि यह फैट की सुरक्षात्मक लेयर को तोड़ नहीं पाता. न शराब न ही वोदका से मिलेगी मदद.