चूंकि यह वायरस कोई जीव नहीं है बल्कि प्रोटीन मॉलीक्यूल होता है, ऐसे में यह मरता नहीं है बल्कि खुद ही क्षय हो जाता है. इसके क्षय होने का वक्त तापमान, ह्यूमिडिटी (नमी) और जिस मटेरियल पर यह है उस पर निर्भर करता है. यह वायरस बेहद क्षणभंगुर (फ्रेजाइल) है.
वसा की परत...
केवल एक चीज जो इसे बचाती है वह इसकी पतली बाहरी परत या फैट है. इसी वजह से साबुन या डिटर्जेंट इसका सबसे अच्छा उपाय है क्योंकि फोम वसा या फैट को काट देती है. इसके लिए आपको हाथों को 20 सेकेंड्स या ज्यादा वक्त के लिए रगड़ना चाहिए ताकि खूब ज्यादा झाग बने.
फैट की लेयर के घुल जाने से प्रोटीन मॉलीक्यूल बिखर जाता है और खुद ही टूट जाता है. हीट से फैट पिघल जाता है. इसी वजह से 25 डिग्री सेल्शियस या उससे ज्यादा गर्म पानी से हाथों और कपड़ों और बाकी दूसरी चीजों को धोना चाहिए. इसके अलावा, गर्म पानी से ज्यादा झाग बनता है और यह और ज्यादा कारगर साबित होता है.
अल्कोहल या 65 फीसदी या उससे ज्यादा अल्कोहल से बना कोई भी द्रव किसी भी फैट को गला देता है. खासतौर पर यह वायरस की बाहरी लिपिड या वसा की परत को गला देता है. एक हिस्सा ब्लीच और पांच हिस्सा पानी से बना कोई भी मिक्स प्रोटीन को सीधे गला देता है, यह इसे अंदर से तोड़ देता है.